महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और समाज सुधारक थीं। उन्हें छायावाद युग की प्रमुख रचनाकारों में गिना जाता है। उनकी कविताएँ भावनाओं से भरी होती थीं, जिनमें करूणा और संवेदनशीलता झलकती थी।
वे सिर्फ एक महान लेखिका ही नहीं, बल्कि महिलाओं के हक के लिए आवाज़ उठाने वाली समाज सुधारक भी थीं। उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। आएये इस लेख मे mahadevi verma ka jivan parichay बारे मे विस्तार से जानते है।

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mahadevi verma ka jivan parichay short mein
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रमुख कवयित्री, निबंधकार और शिक्षाविद थीं। उन्हें छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है। उनका जीवन और योगदान संक्षेप में निम्नलिखित तालिका में प्रस्तुत है:
तत्व | विवरण |
---|---|
पूरा नाम | महादेवी वर्मा |
जन्म | 26 मार्च 1907, फ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेश |
पिता | गोविंद प्रसाद वर्मा |
माता | हेमरानी देवी |
शिक्षा | एम.ए. संस्कृत में, प्रयाग विश्वविद्यालय से |
विवाह | 1914 में स्वरूप नारायण वर्मा से |
संतान | कोई संतान नहीं |
प्रमुख काव्य संग्रह | नीहार, नीरजा, रश्मि, दीपशिखा |
प्रमुख गद्य रचनाएँ | शृंखला की कड़ियाँ, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ |
प्रमुख पुरस्कार | पद्म भूषण (1956), साहित्य अकादमी पुरस्कार (1979), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982), पद्म विभूषण (1988, मरणोपरांत) |
निधन | 11 सितंबर 1987, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश |
महादेवी वर्मा का साहित्यिक योगदान और समाज सुधार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
महादेवी वर्मा जन्म और प्रारंभिक जीवन (Birth and Early Life)
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता गोविंद प्रसाद वर्मा एक शिक्षाविद् थे और माता हेमरानी देवी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। महादेवी वर्मा का पालन-पोषण धार्मिक और सुसंस्कृत वातावरण में हुआ, जिससे उनके भीतर साहित्य और संस्कृति के प्रति रुचि जागृत हुई।
शिक्षा (Education)
महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा मिशनरी स्कूल, इंदौर में हुई। बाद में उन्होंने प्रयाग महिला विद्यापीठ से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे बचपन से ही हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं में रुचि रखती थीं। प्रयाग में रहते हुए उन्होंने साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भाग लेना शुरू किया और लेखन की ओर अग्रसर हुईं।
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महादेवी वर्मा का विवाह और व्यक्तिगत जीवन | Mahadevi Verma Husband & Children
महादेवी वर्मा का विवाह 1914 में, जब वे मात्र 9 वर्ष की थीं, श्री स्वरूप नारायण वर्मा से हुआ था। विवाह के पश्चात भी महादेवी वर्मा ने अपनी शिक्षा जारी रखी और अपने माता-पिता के साथ रहीं, जबकि उनके पति लखनऊ में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे।
उनके बीच पत्राचार के माध्यम से संवाद होता था। स्वरूप नारायण वर्मा का निधन 1966 में हुआ। तब महादेवी वर्मा और स्वरूप नारायण वर्मा की कोई संतान नहीं थी। हालांकि, उनका दाम्पत्य जीवन अधिक सुखमय नहीं रहा, और उन्होंने अपना जीवन साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा को समर्पित कर दिया।
साहित्यिक जीवन की शुरुआत (Beginning of Literary Career)
महादेवी वर्मा को बचपन से ही कविता लिखने का शौक था। उन्होंने किशोरावस्था में ही अपनी पहली कविता लिखी थी। उनकी प्रारंभिक रचनाएँ ‘चाँद’ पत्रिका में प्रकाशित हुईं, जिसने उन्हें एक उभरती हुई कवयित्री के रूप में पहचान दिलाई। उनका लेखन छायावाद की प्रवृत्तियों से प्रभावित था, जिसमें प्रकृति प्रेम, करूणा, आत्मा की अभिव्यक्ति और कोमल भावनाएँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं।
उनकी कविताएँ इतनी संवेदनशील और भावनात्मक थीं कि पाठकों के दिलों को गहराई से छू जाती थीं। “मैं नीर भरी दुख की बदली”, “पथ के साथी”, “यह मन्दिर का दीप नहीं है”, और “जो तुम आ जाते एक बार” जैसी रचनाएँ आज भी पाठकों को भीतर तक भावविभोर कर देती हैं।
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ (Mahadevi Verma ki rachna)
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रख्यात कवयित्री और लेखिका थीं। उनकी रचनाएँ काव्य और गद्य दोनों विधाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। यहाँ उनकी प्रमुख रचनाओं की सूची प्रस्तुत है:
काव्य संग्रह
- नीहार (1930): यह उनका पहला काव्य संग्रह है, जिसमें 1924 से 1928 तक की रचनाएँ शामिल हैं।
- रश्मि (1932): इस संग्रह में 1927 से 1931 तक की कविताएँ संग्रहीत हैं।
- नीरजा (1934): यह संग्रह उनकी संवेदनशीलता और भावनात्मक गहराई को प्रदर्शित करता है।
- सांध्यगीत (1936): इसमें सांध्य समय की भावनाओं को अभिव्यक्त किया गया है।
- दीपशिखा (1942): यह संग्रह उनकी परिपक्व काव्य शैली का उदाहरण है।
- सप्तपर्णा (1959): यह संग्रह उनकी चुनी हुई कविताओं का अनुवादित संस्करण है।
- प्रथम आयाम (1974): इसमें उनकी नई कविताएँ शामिल हैं।
- अग्निरेखा (1990): यह उनकी अंतिम काव्य संग्रहों में से एक है।

गद्य रचनाएँ
- शृंखला की कड़ियाँ: यह निबंध संग्रह नारी जीवन की समस्याओं और समाज में उनकी स्थिति पर केंद्रित है।
- अतीत के चलचित्र (1941): यह आत्मकथात्मक रेखाचित्रों का संग्रह है, जिसमें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।
- स्मृति की रेखाएँ (1943): इसमें उनके जीवन से जुड़े व्यक्तियों और घटनाओं का संवेदनशील चित्रण है।
- मेरा परिवार: यह पशु-पक्षियों पर आधारित रेखाचित्रों का संग्रह है, जो उनके प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- नीलकंठ: यह एक कहानी है, जो उनके पशु-प्रेम को प्रकट करती है।
- गिल्लू: यह एक गिलहरी की कहानी है, जो उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।
अन्य रचनाएँ
- संधिनी (1965): यह ललित निबंधों का संग्रह है।
- यामा (1936): यह उनके चार काव्य संग्रहों का संकलित संस्करण है।
- दीपगीत: यह उनके गीतों का संग्रह है।
- स्मारिका: यह उनकी स्मृतियों पर आधारित रचना है।
- हिमालय (1963): यह हिमालय पर आधारित कविताओं का संग्रह है।
- आधुनिक कवि महादेवी: यह उनकी चुनी हुई कविताओं का संग्रह है।
महादेवी वर्मा की रचनाएँ हिंदी साहित्य में अमूल्य योगदान हैं, जो आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं।
महादेवी वर्मा और छायावाद (Mahadevi Verma and Chhayavad)
छायावाद हिंदी कविता का वह युग था, जिसमें भावनाओं की गहराई और कल्पनाशीलता प्रमुख रूप से उभरकर आई। महादेवी वर्मा को जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और सुमित्रानंदन पंत के साथ छायावादी युग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
उनकी कविताएँ आत्मा की पुकार, विरह वेदना और स्त्री-मन की गूढ़ संवेदनाओं को व्यक्त करती हैं। उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं:
- नीहार (1930)
- रश्मि (1932)
- नीरजा (1934)
- सांध्यगीत (1936)
गद्य साहित्य में योगदान (Contribution to Prose Literature)
महादेवी वर्मा ने केवल काव्य-लेखन ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने गद्य साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निबंधों और आत्मकथात्मक रचनाओं में समाज सुधार, नारी जीवन की समस्याएँ और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख रूप से उभरकर आईं। उनकी प्रमुख गद्य रचनाएँ हैं:
- शृंखला की कड़ियाँ (नारी जीवन पर आधारित)
- अतीत के चलचित्र (आत्मकथात्मक)
- स्मृति की रेखाएँ
शिक्षिका और संपादक के रूप में भूमिका (Role as a Teacher and Editor)
महादेवी वर्मा न केवल एक लेखिका थीं, बल्कि वे शिक्षिका भी थीं। उन्होंने प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य और कुलपति के रूप में कार्य किया। उन्होंने ‘चाँद’ पत्रिका का संपादन भी किया, जिससे हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ मिलीं।
समाज सुधार और महिला सशक्तिकरण (Social Reform and Women Empowerment)
महादेवी वर्मा ने महिलाओं के अधिकारों और उनकी शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने नारी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए अनेक लेख लिखे और महिलाओं की समस्याओं पर खुलकर अपनी राय रखी। उनका मानना था कि समाज में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और अपनी पहचान स्वयं बनानी चाहिए।

पुरस्कार और सम्मान
महादेवी वर्मा को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। प्रमुख पुरस्कार निम्नलिखित हैं:
- 1956: पद्म भूषण
- 1979: साहित्य अकादमी पुरस्कार
- 1982: ज्ञानपीठ पुरस्कार
- 1988: पद्म विभूषण (मरणोपरांत)

निधन और साहित्य में योगदान की अमरता (Death and Literary Legacy)
महादेवी वर्मा का निधन 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद (प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनकी रचनाएँ आज भी हिंदी साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। उनका साहित्यिक योगदान हिंदी भाषा के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने न केवल छायावाद को सशक्त बनाया, बल्कि गद्य साहित्य में भी नारी चेतना को जागरूक किया।
mahadevi verma ka jivan parichay in hindi FAQs
mahadevi verma ka jivan parichay से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय कैसे लिखते हैं?
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय लिखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है:
परिचय: हिंदी साहित्य की महान कवयित्री और लेखिका
जन्म: 26 मार्च 1907, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: प्रयाग महिला विद्यापीठ से उच्च शिक्षा
साहित्यिक योगदान: छायावादी कविता की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर
प्रमुख रचनाएँ: नीरजा, रश्मि, दीपशिखा, शृंखला की कड़ियाँ
सम्मान: पद्म भूषण, पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार
निधन: 11 सितंबर 1987, इलाहाबाद
“अतीत के चलचित्र” किसकी रचना है?
“अतीत के चलचित्र” महादेवी वर्मा की आत्मकथात्मक रचना है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन की स्मृतियों को संजोया है।
सक्सेरिया पुरस्कार क्या है?
सक्सेरिया पुरस्कार एक प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार है, जिसे साहित्य और लेखन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लेखकों को प्रदान किया जाता है। महादेवी वर्मा को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
नीरजा किसकी रचना है?
“नीरजा” महादेवी वर्मा का प्रसिद्ध काव्य संग्रह है, जिसे 1934 में प्रकाशित किया गया था।
महादेवी वर्मा का उपनाम क्या है?
महादेवी वर्मा को “आधुनिक मीरा” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उनकी कविताओं में भक्ति, प्रेम और वेदना का गहरा मिश्रण है।
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचना क्या है?
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
काव्य संग्रह: नीरजा, रश्मि, सांध्यगीत, दीपशिखा
गद्य रचनाएँ: शृंखला की कड़ियाँ, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ
महादेवी वर्मा की मृत्यु कहाँ हुई थी?
महादेवी वर्मा का निधन 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद (प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था।
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय क्या है?
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और समाज सुधारक थीं। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। उनका जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। उन्होंने नारी जागरण और महिला सशक्तिकरण पर विशेष कार्य किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ “नीरजा,” “रश्मि,” “दीपशिखा” आदि हैं। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार जैसे कई सम्मान मिले। उनका निधन 11 सितंबर 1987 को हुआ।
महादेवी वर्मा का दूसरा नाम क्या था?
महादेवी वर्मा को साहित्यिक जगत में “आधुनिक मीरा” के नाम से भी जाना जाता था।
महादेवी वर्मा के समकालीन प्रमुख साहित्यकार कौन थे?
महादेवी वर्मा के समकालीन प्रमुख साहित्यकार थे:
जयशंकर प्रसाद
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सुमित्रानंदन पंत
रामधारी सिंह ‘दिनकर’
“शृंखला की कड़ियाँ” किस विषय पर आधारित पुस्तक है?
“शृंखला की कड़ियाँ” महादेवी वर्मा द्वारा लिखित निबंधों का संग्रह है, जो नारी जीवन और उनकी सामाजिक समस्याओं पर आधारित है।
“नीरजा” किसकी रचना है और इसमें क्या विशेषता है?
“नीरजा” महादेवी वर्मा द्वारा रचित प्रसिद्ध काव्य संग्रह है, जिसमें करूणा, प्रेम और स्त्री-मन की गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की गई हैं।
महादेवी वर्मा की मृत्यु कब और कहाँ हुई थी?
महादेवी वर्मा का निधन 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद (प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था।
महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक मीरा’ क्यों कहा जाता है?
महादेवी वर्मा को “आधुनिक मीरा” कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में भक्ति, प्रेम, दर्द और आत्मा की गहरी संवेदनाएँ प्रकट होती हैं।
महादेवी वर्मा को कौन-कौन से पुरस्कार मिले थे?
महादेवी वर्मा को साहित्य में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें प्रमुख हैं:
1956: पद्म भूषण
1979: साहित्य अकादमी पुरस्कार
1982: ज्ञानपीठ पुरस्कार
1988: पद्म विभूषण (मरणोपरांत)
महादेवी वर्मा का साहित्यिक योगदान क्या है?
महादेवी वर्मा ने हिंदी साहित्य में छायावादी कविता को सशक्त किया। उन्होंने स्त्री जागरूकता, समाज सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ हैं:
काव्य संग्रह: नीरजा, रश्मि, दीपशिखा, सांध्यगीत
गद्य रचनाएँ: शृंखला की कड़ियाँ, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ
महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
महादेवी वर्मा कौन थीं?
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की महान कवयित्री, लेखिका और शिक्षिका थीं। वे छायावादी युग की प्रमुख स्तंभों में से एक थीं और नारी सशक्तिकरण की समर्थक थीं।
निष्कर्ष (Conclusion)
महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की अमर विभूति थीं। उनकी कविताएँ और लेख आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने न केवल साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि समाज में स्त्री शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनका जीवन और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।